रात अकेली .. तनहा सहेली ... चुपके से किस्से सुनाती
बात पुरानी, खामोशी की जुबानी, निंदिया बुलाती ...
तारे टिमटिमाते .. चंदा मुस्कुराता .. हवा लोरियॉं गुनगुनाती ...
बेहका दीवाना, मदहोश वीराना, भूला अपना ठिकाना ...
ढूंढ के लाओ, सबको बुलाओ .. याद आया फिर वो जमाना .....